डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 50+अनमोल विचार। Dr.Sarvepalli RadhaKrishnan Quotes in Hindi

दोस्तों आज हम स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन ,जिनका जन्म हर साल 5 सितम्बर को हम सब लोग शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है। तो आइये उनके कुछ अनमोल विचारो को जानते है।

नाम – डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन

जन्म – 5 सितम्बर 1888.
जन्म स्थान – तिरुट्टनी, तमिल नाडु, भारत.
धर्म – हिन्दू .
व्यवसाय – प्रोफेसर (अध्यापक), दार्शनिक .
सम्मान – भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति, भारतरत्न से सम्मानित.
मृत्यु – 17 अप्रैल 1975 (उम्र 86 वर्ष)

ये भी जरूर पड़े 

Happy Diwali 2018 Quotes Status Wishes in Hindi

Dr.A.P.J Abdul Kalam Quotes in Hindi। अब्दुल कलाम के अनमोल बचन

डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन जीवन परिचय इन हिंदी। Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Biography in Hindi

50+Happy Shri Krishna Janmasthami 2018 Shayari Whatsapp Messages,Wishes in Hindi

500+Best Teachers Day Shayari ,Whats app and Facebook Status in Hindi

श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी का जीवन परिचय। Atal Bihari Vajpayee biography in hindi


 हमें मानवता की उन नैतिक जड़ों को जरुर याद करना चाहिए जिनसे अच्छी व्यवस्था और स्वतंत्रता दोनों बनी रहे.
 आयु या युवा समय का मापदंड नहीं है. हम जितना खुद को महसूस करते हैं हम उतने ही युवा या उतने ही बुजुर्ग हैं.
 किताबे वह माध्यम है जिनके द्वारा हम दो संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते है.
 लोकतंत्र कुछ विशेषाधिकार रखने वाले व्यक्तियों का ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति की आध्यात्मिक संभावनाओं में एक विश्वास है.
 केवल ज्ञान और विज्ञान के आधार पर ही आनंद और खुशी का जीवन सम्भव है.
 मृत्यु कभी भी एक अंत या बाधा नहीं है बल्कि एक नए कदम की शुरुआत है.
 हमारे सारे विश्व संगठन गलत साबित हो जायेंगे यदि वे इस सत्य से प्रेरित नहीं होंगे कि प्यार ईर्ष्या से ज्यादा मजबूत है.
 ऐसा बोला जाता है कि एक साहित्यिक प्रतिभा, सबको समान दिखती है पर उसके समान कोई नहीं दिखता है.
 जीवन का सबसे बड़ा उपहार एक उच्च जीवन का सपना है.

उम्र या युवावस्था का काल-क्रम से लेना-देना नहीं है. हम उतने ही नौजवान या बूढें हैं जितना हम महसूस करते हैं. हम अपने बारे में क्या सोचते हैं यही मायने रखता है.

 केवल निर्मल मन वाला व्यक्ति ही जीवन के आध्यात्मिक अर्थ को समझ सकता है. स्वयं के साथ ईमानदारी आध्यात्मिक अखंडता की अनिवार्यता है.
 भगवान् की पूजा नहीं होती बल्कि उन लोगों की पूजा होती है जो उनके  के नाम पर बोलने का दावा करते हैं.पाप पवित्रता का उल्लंघन नहीं ऐसे लोगों की आज्ञा  का उल्लंघन बन जाता है.

धन, शक्ति और दक्षता केवल जीवन के साधन हैं खुद जीवन नहीं।

मनुष्य को सिर्फ तकनीकी दक्षता नही बल्कि आत्मा की महानता प्राप्त करने की भी ज़रुरत है।

कोई भी जो स्वयं को सांसारिक गतिविधियों से दूर रखता है और इसके संकटों के प्रति असंवेदनशील है वास्तव में बुद्धिमान नहीं हो सकता।

कहते हैं कि धर्म के बिना इंसान लगाम के बिना घोड़े की तरह है।

 मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय अगर 5 सितम्बर का दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी.
 हमें तकनीकी ज्ञान के अलावा आत्मा की महानता को प्राप्त करना भी जरूरी हैं.
 कला मानवीय आत्मा की गहरी परतों को उजागर करती हैं. कला तभी संभव हैं जब स्वर्ग धरती को छुए.
 भगवान सभी आत्माओं का आत्मा है – सर्वोच्च आत्मा – सर्वोच्च चेतना
 जो खुद को दुनिया की गतिविधियों से दूर कर सकता हैं और दूसरो का दुःख नही समझता, वह इंसान नही हो सकता हैं.
शांति, राजनीतिक या आर्थिक बदलाव से नही आ सकती, बल्कि मानवीय स्वभाव में बदलाव से आ सकती हैं. 
 पुस्तकें वो साधन हैं जिनके माध्यम सी हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निमार्ण कर सकते हैं.
 सबसे खराब पापी का भविष्य है, यहां तक कि सबसे महान संत के पास भूतकाल है. कोई भी इतना अच्छा या बुरा नहीं है जितना वह सोचता है.
 जीवन का सबसे बड़ा उपहार एक उच्च जीवन का सपना है.
 ज्ञान हमें शक्ति देता है, प्रेम हमें परिपूर्णता देता है
 शांति राजनीतिक या आर्थिक बदलाव से नहीं आ सकते बल्कि मानवीय स्वभाव में बदलाव से आ सकती है.
 मौत कभी अंत या बाधा नहीं है बल्कि अधिक से अधिक नए कदमो की शुरुआत है.
 जीवन को बुराई की तरह देखता और दुनिया को एक भ्रम मानना महज कृतध्नता है.
 धन, शक्ति और दक्षता केवल जीवन के साधन हैं खुद जीवन नहीं.
 कोई भी जो स्वयं को सांसारिक गतिविधियों से दूर रखता है और इसके संकटों के प्रति असंवेदनशील है वास्तव में बुद्धिमान नहीं हो सकता.
 राष्ट्र, लोगों की तरह सिर्फ जो हांसिल किया उससे नहीं बल्कि जो छोड़ा उससे भी निर्मित होते हैं.
 यदि मानव  दानव  बन जाता  है तो ये उसकी  हार  है , यदि मानव महामानव बन जाता है तो ये उसका चमत्कार  है .यदि मनुष्य  मानव  बन जाता है तो ये उसके जीत है .
 किताब पढना हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची ख़ुशी देता है.
  हमें मानवता को उन नैतिक जड़ों तक वापस ले जाना चाहिए जहाँ से अनुशाशन और स्वतंत्रता दोनों का उद्गम हो.
 एक साहित्यिक प्रतिभा , कहा जाता है कि हर एक की तरह दिखती है, लेकिन उस जैसा कोई नहीं दिखता.
 दुनिया के सारे संगठन अप्रभावी हो जाएंगे यदि यह सत्य कि ज्ञान अज्ञान से शक्तिशाली होता है उन्हें प्रेरित नहीं करता।
 शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। अत:विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए।
 कोई भी आजादी तब तक सच्ची नहीं होती,जअगर हम दुनिया के इतिहास को देखे, तो पाएंगे कि सभ्यता का निर्माण उन महान ऋषियों और वैज्ञानिकों के हाथों से हुआ है,जो स्वयं विचार करने की सामर्थ्य रखते हैं,जो देश और काल की गहराइयों में प्रवेश करते हैं,उनके रहस्यों का पता लगाते हैं और इस तरह से प्राप्त ज्ञान का उपयोग विश्व श्रेय या लोक-कल्याण के लिए करते हैं।ब तक उसे विचार की आजादी प्राप्त न हो। किसी भी धार्मिक विश्वास या राजनीतिक सिद्धांत को सत्य की खोज में बाधा नहीं देनी चाहिए।
 शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें। 
 आयु या युवा समय का मापदंड नहीं है. हम जितना खुद को महसूस करते हैं हम उतने ही युवा या उतने ही बुजुर्ग हैं.
 लोकतंत्र कुछ विशेषाधिकार रखने वाले व्यक्तियों का ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति की आध्यात्मिक संभावनाओं में एक विश्वास है.
 केवल ज्ञान और विज्ञान के आधार पर ही आनंद और खुशी का जीवन सम्भव है.
 हमारे सारे विश्व संगठन गलत साबित हो जायेंगे यदि वे इस सत्य से प्रेरित नहीं होंगे कि प्यार ईर्ष्या से ज्यादा मजबूत है.
 पवित्र आत्मा वाले लोग इतिहास के बाहर खड़े हो कर भी इतिहास रच देते हैं.
 मानव का दानव बनना उसकी हार है. मानव का महामानव बनना उसका चमत्कार है. मनुष्य का मानव बनना उसकी जीत है.
 राष्ट्र, व्यक्तियों की तरह है, उनका निर्माण केवल इससे नहीं होता है कि उन्होंने क्या हासिल किया बल्कि इससे होता है कि उन्होंने क्या त्याग किया है.
 ऐसा कहा जाता है कि धर्म के बिना आदमी उस घोड़े की तरह है जिसमे पकड़ने के लिए लगाम न हो.
 वैचारिक युक्ति में विश्वास अहंकार का तार्किक भाग है, जो स्वार्थी अहंकार को जन्म देता है और यह आत्मा के लिए घातक अहंकार है.
  मानव प्रकृति मौलिक रूप से अच्छी है, और ज्ञान के प्रसार से सभी बुराइयों का अंत हो जायेगा.
 हमारे पास जो मानव जीवन है वह मानव जीवन का केवल कच्चा माल है जैसा कि इसे होना चहिये .
 उम्र या युवावस्था का काल-क्रम से लेना-देना नहीं है। हम उतने ही नौजवान या बूढे हैं जितना हम महसूस करते हैं। हम अपने बारे में क्या सोचते हैं यही मायने रखता है।
 कला मानवीय आत्मा की गहरी परतों को उजागर करती है। कला तभी संभव है जब स्वर्ग धरती को छुए।
 लोकतंत्र सिर्फ विशेष लोगों के नहीं बल्कि हर एक मनुष्य की आध्यात्मिक संभावनाओं में एक यकीन है।
 शांति, राजनीतिक या आर्थिक बदलाव से नही आ सकती, बल्कि मानवीय स्वभाव में बदलाव से आ सकती हैं.
 जो खुद को दुनिया की गतिविधियों से दूर कर सकता हैं और दूसरो का दुःख नही समझता, वह इंसान नही हो सकता हैं.
 यदि मानव दानव बन जाता हैं तो ये उसकी हार हैं, यदि मानव महामानव बन जाता हैं तो ये उसका चमत्कार हैं. यदि मनुष्य मानव बन जाता हैं तो ये उसकी जीत हैं.
 आध्यात्मिक जीवन भारत की प्रतिभा हैं.
 केवल निर्मल मन वाल ब्यक्ति ही जीवन के आध्यात्मिक अर्थ को समझ सकता हैं. स्वयं के साथ ईमानदारी आध्यात्मिक अखंडता की अनिवार्यता हैं.
 भगवान् की पूजा नहीं होती बल्कि उन लोगों की पूजा होती है जो उनके  के नाम पर बोलने का दावा करते हैं.पाप पवित्रता का उल्लंघन नहीं ऐसे लोगों की आज्ञा  का उल्लंघन बन जाता है.

\दोस्तों अगर आपको  डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अनमोल विचार बाला ये लेख अच्छा लगा हो तो आप अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।

About the author

Dilshad Saifi

Hey, My Name is Dilshad Saifi by Procession i'm a Pharmacist and Blogger by Choice. I write about Health, Fitness, Internet and Tech.

Leave a Comment