एम करूणानिधि का जीवन परिचय हिंदी में

एम करूणानिधि जी का एक बीमारी के चलते मंगलबार 7/8/2018 को का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है एम करूणानिधि का जन्म 3 जून सन 1924 को मुत्तुबेल ,और अंजुगम के यहां भारत के नागपट्टिनम के तिरुक्कुवलइ में  दक्षिणमूर्ति के रूप में हुआ था। एम करूणानिधि एक महान भारतीय राजनेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री है। बे सन 1969 में डीएमके के संस्थापक सी एन अन्नादुरई की मौत के बाद इन्हे तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बना दिया गया। और ये पांच बार (1969 -71 ,1971 -76 ,1989 -91 ,1996 -2001 ,2006 -2011 )तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके है। करूणानिधि ने अपने 60 साल के राजनीति के कॅरिअर में अपनी भागीदारी बाले हर किसी चुनाब में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। 2004 के लोकसभा चुनाब में उन्होंने तमिलनाडु और पुदुचेरी में डीएमके के नेतृत्व बाली डीपीए  का नेतृत्व किया और लोकसभा की 40 सीटों को जीत लिया। इसके बाद उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाब में उन्होंने डीएमके के  जरिये जीती गई सीटों की संख्या 16 से बढ़ाकर 18 कर दिया। और तमिलनाडु और पुदुचेरी में यूपीए का नेतृत्व कर बहुत छोटे से गठबंधन के बाबजूद उन्होंने बहा पर 28 सीटों पर जीत प्राप्त की।

एम करूणानिधि तमिल सिनेमा जगत के एक नाटककार और पटकथा लेखक भी थे। उनके समर्थक उन्हें कलाईनार कहकर बुलाते थे।

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करूणानिधि की जीवनी

जन्म                                    3 जून 1994

जन्म स्थान                          तिरुक्कवलई भारत

पत्नी                                  पद्मावती,दयालु, राजति अम्माल

संताने                                4 बेटे,2 बेटियां

निवास                              तमिलनाडु भारत

आरम्भिक जीवन 

करूणानिधि ने अपने जीवन की शुरुआत तमिल फिल्म उद्योग में एक पटकथा लेखक के रूप में की थी। अपनी बुद्धि और भाषण के माध्यम से बे बहुत काम समय में एक महान राजनेता बन गए। करूणानिधि द्रविड़ आंदोलन से जुड़े थे और बे समाजबादी और बुद्दिबाद आदर्शो को बढ़ाबा देने बलि ऐतिहासिक और सामाजिक कहानिया लिखने के लिए मशहूर थे। .उन्होंने तमिल सिनेमा जगत का इस्तमाल करके अपने पराशक्ति नमक फिल्म के माध्यम से अपने राजनितिक बिचारो  प्रचार किया। पराशक्ति फिल्म तमिल सिनेमा जगत के लिए एक महत्तपूर्ण मोड़ साबित हुई क्यूकि इसने द्रविड़ आंदोलन की बिचारधाराओ का समर्थन किया। और इसने तमिल फिल्म जगत के दो मशहूर अभिनेताओं शिवाजी गणेशन और एसएस राजेंद्रन से दुनिया को परिचित करबाया।दोस्तों शुरू में इस फिल्म पर प्रतिबन्द लगा  दिया गया था। लेकिन बाद में इसे सन 1952 में रिलीज कर दिया गया था। ये बॉक्स ऑफिस पर बहुत ही बड़ी फिल्म के रूप में साबित हुई। इसी तरह करुणानिधि की दो और फिल्मे थी पनाम ,और थंगारथनम थी। और सन 1950 के दशक में उनके दो नाटकों को प्रतिबंधित कर दिया गया।

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राजनीति में प्रबेश 

करूणानिधि ने 14 साल की उम्र में ही राजनीति में प्रबेश किया और उसके बाद हिंदी बिरोधी आंदोलन में भाग लिया। और उन्होंने अपने इलाके के स्थानीय युवाओं के एक संगठन की संस्थापना की। करूणानिधि ने अपने सदस्यों को मनाबर नेसन नामक एक हस्तलिखित अख़बार परिचालित किया। और उसके बाद उन्होंने तमिलनाडु तमिल मनाबर मंद्रम नामक एक छात्र संगठन की स्थापना की जो की द्रविण आंदोलन का पहला छात्र बिंग था। करूणानिधि ने अपने अन्य सदस्यों के साथ छात्र समुदय और खुद को सामाजिक कर्यो में शामिल कर लिया।

करूणानिधि पांच बार बने मुख्यमंत्री 

साल से वर्ष तक चुनाव
1969 1971 तमिलनाडु राज्य विधानसभा चुनाव, 1967
1971 1976 तमिलनाडु राज्य विधानसभा चुनाव, 1971
1989 1991 तमिलनाडु राज्य विधानसभा चुनाव, 1989
1996 2001 तमिलनाडु राज्य विधानसभा चुनाव, 1996
2006 वर्तमान तमिलनाडु राज्य विधानसभा चुनाव, 2006

करूणानिधि अपने 60 साल के राजनितिक करियर में पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। सबसे पहले बो 1969 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे उस समय में देश के प्रधानमंत्री (PM ) जबाहरलाल नेहरू थे। और दूसरी बार में प्रधानमंत्री इंद्रागाँधी थी। और उसके बाद बे तीसरी बार मुख्मंत्री बने तब प्रधानमंत्री राजीवगांधी थे। और जब चौथी बार मुख्मंत्री बने तब प्रधानमंत्री पीपीसिम्हा राब थे। और जब करूणानिधि पांचबी बार मुख्यमंत्री बने तब पीएम मनमोहन सिंह थे।

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विधायिका में पद

साल से वर्ष तक पद
1962 1967 विपक्ष के उप नेता
1967 1969 लोक निर्माण के कैबिनेट मंत्री
1977 1980 विपक्ष नेता
1980 1983 विपक्ष नेता
1984 बाद विधान परिषद के लिए निर्वाचित

विधान सभा के सदस्य विधायक

वर्ष निर्वाचित/पुनर्निर्वाचित स्थान
1957 निर्वाचित कुलितलाई
1962 निर्वाचित तंजावुर
1967 निर्वाचित सैदापेट
1971 पुनर्निर्वाचित सैदापेट
1977 निर्वाचित अन्ना नगर
1980 पुनर्निर्वाचित अन्ना नगर
1989 निर्वाचित हार्बर
1991 पुनर्निर्वाचित हार्बर
1996 निर्वाचित चेपॉक
2001 पुनर्निर्वाचित चेपॉक
2006 पुनर्निर्वाचित चेपॉक

सत्ता प्राप्ति 

करूणानिधि को तिरुचिरापल्ली जिले के कुलिथालाई के लिए बिधानसभा से 1957 में तमिलनाडु बिधानसभा के लिए उन्हें पहली बार चुना गया था। और 1961 में डी एम के कोषाध्यक्ष  बने और उसके बाद सन 1962 में बे राज्य बिधानसभा में बिपक्ष के उपनेता बने और सन 1967 में जब डी एम के सत्ता में आई बे सार्बजनिक कार्य मंत्री बने।

उसके बाद सन 1969 में जब अन्नादुरई की मृत्यु के बाद करूणानिधि को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बना दिया गया। मई 2006 के चुनाब में गठबंधन द्वारा अपने प्रमुख जे जयललिता के हरने के बाद उन्होंने 13 मई 2006 को तमिलनाडु की कमान संभाली। तमिलनाडु बिधानसभा में उन्हें 11 बार और जब समाप्त हो चुके तमिलनाडु बिधानसभा परिषद में एक बार निर्बाचित किज्ञा है।

पटकथायें 

दोस्तों करूणानिधि ने अपनी 20 बर्ष की आयु में  ज्यूपिटर पिक्चर्स के लिए पटकथा लेखक के रूप में कार्य शुरू किया। दोस्तों करूणानिधि जी ने अपनी पहली फिल्म राजकुमारी  से लोकप्रियता हाशिल की। पटकथा लेखक के रूप में उनके हुनर में यही से निखार आना शुरू हुआ। करूणानिधि के द्वारा लिखी गई पटकथा में शामिल है जैसे। …..राजकुमारी ,अभिमन्यु ,मंदिरी कुमारी,मरुद नाट्टू इलवरसी ,मनामगन ,देबकी ,पनम ,तिरुम्बिपार ,नाम मनोहर ,अम्मियापन ,मलाई कल्लन , कुरावांजी, ताइलापिल्लई, कांची तलैवन, पूम्बुहार, पूमालई, मनी मगुड्म, मारक्क मुडियुमा?, अवन पित्तना?, पूक्कारी, निदिक्कु दंडानई, पालईवना रोजाक्कल, पासा परावाईकल, पाड़ाद थेनीक्कल, नियाय तरासु, पासाकिलिग्ल, कन्नम्मा, यूलियिन ओसई, पेन सिन्गम और इलइज्ञइन .

साहित्य 

करूणानिधि तमिल साहित्य में आपने योगदान के लिए बहुत मशहूर है। उन्होंने अपने योगदान में कबिताए ,चिट्ठियां ,पटकथाएं ,उपन्यास ,जीवनी ,ऐतिहासिक उपन्यास ,मंच नाटक इत्यादि शामिल है।करूणानिधि ने अपने 20 बर्ष की उम्र में  ज्युपिटर्स पिक्चर ले लिए पटकथा लिखी थी। करूणानिधि ने अपनी पहली फिल्म राजकुमारी की पटकथा लिखकर लोकप्रियता को हाशिल किया। ोे उन्होंने लगभग 75 पठकथाये लिखी है।

पुस्तके 

करूणानिधि द्वारा लिखी गई पुस्तके है। …रोमपुरी ,पांडियन ,तेनपंडि सिंगम ,वेल्लीकिलमई, नेंजुकू नीदि, इनियावई इरुपद, संग तमिल, कुरालोवियम, पोन्नर शंकर, और तिरुक्कुरल उरई . उनकी गद्य और अनेक 100 से भी अधिक पुस्तके है।

संपादक और प्रकाशक 

करूणानिधि ने 10 अगस्त 1942 को मुरासोली का आरम्भ किया था। अपने बचपन में बे एक मुरासोली नामक अख़बार के संस्थापक संपादक और प्रकाशक थे। और उसके बाद में बो एक साप्ताहिक और एक दैनिक अख़बार बन गया। दोस्तों उन्होंने अपनी राजनितिक बिचारधारा से सम्बंधित मुद्दो को जनता के सामने लेन के लिए एक पत्रकार और कार्टूनिस्ट के रूप में अपनी प्रतिभा का इस्तमाल किया। करूणानिधि अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओ को नाम से सम्बोधित करके रोज खत लिखते थे। और बह 50 बर्ष से ये खत लिखते आ रहे थे। और इसके अलाबा उन्होंने कुडियारसु के संसपादक के रूप में काम किया है और उन्होंने अपना काफी समय मुत्तारम पुस्तिका को दिया।

बिश्व तमिल सम्मलेन 

करूणानिधि ने सन 1970 में पेरिस में जाकर आयोजित तृतीये विश्ब तमिल सम्मलेन के उद्घाटन दिवस पर और सन 1987 में मलेसिया में आयोजित षष्ठम विश्व तमिल सम्मलेन के उद्घाटन दिवस पर भाषण दिए।

करूणानिधि पर लिट्टे के साथ संबंध के आरोप

दोस्तों जब राजीव गाँधी की हत्या की जांच करने बाले जस्टिस जैन कमीशन की अंतरिम रिपोर्ट में एम करूणानिधि पर लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम को बढ़ाबा देने का अरूप लगाया था। लेकिन अंतिम रिपोर्ट में एम करूणानिधि और  डीएमके  पार्टी को जिम्मेदारी मन जाये। लेकिन जो अंतिम रिपोर्ट आई उसमे इस प्रकार का कोई आरोप शामिल नहीं था

पुरुस्कार और खिताब 

  • करूणानिधि को कभी कभी प्यार से कलाईनार और मुथामिझ कविनार भी कहा जाता है।
  • सन 1971 में अन्नामलई विश्बबिद्यालय में उन्हें मानक डॉक्टरेट की उपधि से सम्मानित किया गया।
  • 15 दिसम्बर सन 2006 को तमिलनाडु के राज्यपाल और मदुरई कामराज विश्बबिधायलय के चांसलर महमहिम थिरू सुरजीत सिंह बरनाला ने 40 बे बार्षिक समारोह के अबसर पर मुख्यमंत्री को मानक डॉक्टरेट की उपधि से नबाजा।

करूणानिधि ने भगबान राम पर दिया ब्यान 

M Karunnidhi

करूणानिधि ने भगबान राम पर ही बयान दिया के 17 लाख साल पहले यह पर एक ब्यक्ति आया था और जिसका  नाम राम था उन्होंने बिना छूए राम सेतु का निर्माण किया। तो उन्होंने इस बात पर कहाँ था के कोण है राम और बो कौन सा कॉलेज है  जिसमे स्तानक किया है है किसी के पास उसका प्रणाम। इस बात  को लेकर काफी बिबाद हुआ था।

करूणानिधि का निधन

करूणानिधि जी का  एक बीमारी के चलते मंगलबार 7/8/2018 को का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने मंगलवार शाम चेन्नई के कावेरी अस्पताल में आखिरी सांस ली।94 वर्षीय नेता पिछले 11 दिनों से जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने मंगलवार शाम 6:10 बजे आखिरी सांस ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है,

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Dilshad Saifi

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