महात्मा गाँधी का जीवन परिचय इन हिंदी । Mahatma Gandhi Biography In Hindi

दोस्तों हमारे भारत के राष्ट्र पिता मोहनदास कर्मचंद गाँधी जिन्हे हम बापू या महात्मा गाँधी के नाम से भी जाना जाता है। पूरे भारत में महात्मा गाँधी जी को सुपर फाइटर के नाम से भी जाना जाता है। इन्होने बहुत से आंदोलन किये और उसमे जीत भी हाशिल की। पूरे भारत बर्ष में सायद कोई होगा की इन्हे नहीं जनता होगा। दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम आपको महात्मा गाँधी से जुडी सभी घटनाओ के बारे में बताएँगे।

श्री मोहनदास करमचंद गांधी जी (महात्मा गांधी)(02 अक्टूबर 1869- 30 जनवरी 1948) – महात्मा गांधी का जीवन परिचय

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पूरा नाम – मोहनदास करमचंद गांधी
जन्म – 2 अक्तुंबर 1869
जन्मस्थान – पोरबंदर (गुजरात)
पिता – करमचंद
माता – पुतली बाई
शिक्षा – 1887 में मॅट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण। 1891 में इग्लंड में बॅरिस्टर बनकर वो भारत लोटें।
विवाह – कस्तूरबा गाँधी
बच्चों के नाम – हरिलाल  मणिलाल, रामदास, देवदास
उपलब्धियां – भारत के राष्ट्रपिता, भारत को आजाद दिलवाने में अहम योगदान, सत्य और अहिंसा के प्रेरणा स्त्रोत, भारत के स्वतंत्रा संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान भारत छोड़ो आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन स्वदेशी आंदोलन आदि।
महत्वपूर्ण कार्य – सत्या और अहिंसा का महत्व बताकर इसको लोगों तक पहुंचाया, छुआ-छूत जैसी बुराइयों को दूर किया
मृत्यु – 30 जनवरी, 1948

राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी जा का जन्म 2 October 1869  को गुजरात में पोरबन्दर में हुआ था। और इनके पिता का नाम कर्मचंद गाँधी था जो की राजकोट के दीवान थे और उनकी माता  पुतलीबाई था जो की बहुत धार्मिक बिचारो बाली महिला थी  और इसी बजह से महात्मा गाँधी पर उनके विचारो का प्रभाब पड़ा। महात्मा गाँधी की मात्र 13 बर्ष की उम्र में ही उनका विवहा हो गया था। और उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गाँधी था। गाँधी जी के चार पुत्र थे। जिनको शुरू से ही सत्य और अहिंसा का ज्ञान दिया गया।

महात्मा गाँधी जी के चार पुत्र हुए।

  • हरिलाल गाँधी (1888 ई)
  • मणिलाल गाँधी (1892 ई)
  • रामदास गाँधी (1897 ई)
  • देवदास गाँधी (1900 ई)

 

महात्मा गाँधी जी की शिक्षा। 

महात्मा गाँधी जी ने सन 1887 ई में बम्बई यूनिवर्सिटी से मेट्रिक की परीक्षा पास की। और आगे की शिक्षा भावनगर के शामलदास स्कूल से प्राप्त की। महात्मा गाँधी जी ने एक बर्ष तक बॉम्बे विश्बविद्द्यालय में कानून की पढ़ाई की। और उसके बाद सन 1891 में उन्होंने लन्दन जाकर लन्दन विश्बबिद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। और उसके बाद में बापस मुंबई आ गए और एक साल तक कानून की तैयारी की।

वकालत का आरम्भ 

1 .महात्मा गाँधी जी इंग्लैंड और वेल्स बार एसोसिएशन के द्वारा बुलाये जाने पर बम्बई बवास लौट आये और यहा पर अपनी बकालत शुरू की।

2 . गाँधी जी को बम्बई में सफलता नहीं मिली जिसके कारण गाँधी जी को अंशकालिक शिक्षक के पद पर काम करने के लिए उन्होंने अर्जी दाखिल की लेकिन बो भी अस्वीकार हो गई।

3 . महात्मा गाँधी जी को जीवका के लिए मुकदमो की अर्जिया लिखने का कार्य आरम्भ करना पड़ा। लेकिन दोस्तों कुछ कारणबश उनको ये भी काम को छोड़ना पड़ा।

4 . 1893 ई में गाँधी जी एक वर्ष के करार के साथ दक्षिण अफ्रीका गए| दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश सरकार की फर्म नेटल से यह वकालत करार हुआ था|

महात्मा गाँधी जी की दक्षिण अफ्रीका यात्रा।

दोस्तों महात्मा गाँधी जी को दक्षिण अफ्रीका स्थित एक कंपनी ने उन्हें अपना कानूनी सलाहकार के पद पर काम करने का प्रस्ताब दिया। और इस प्रस्ताव को स्वीकार करके गाँधी जी अफ्रीका के लिए रबाना हो गए। और उन्होंने बहा पर 20 साल तक रहे। दोस्तों अफ्रीका में रहकर भी गाँधी जी ने बहा के लोगो के लिए बहुत सी कानूनी लड़ाई लड़ी। और उसके साथ साथ गाँधी जी को बहुत सारे बेद भाव का सामना करना पड़ा।

 

 

 

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Dilshad Saifi

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